यूपी में बत्ती गुल, बिजली के लिए तरसे लोग

यूपी में बत्ती गुल, बिजली के लिए तरसे लोग
▶️ बिजली विभाग में निजीकरण प्रस्ताव का विरोध कर रहे कर्मचारी
▶️ यूपी समेत अन्य राज्यों के 15 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी की हड़ताल, बिजली विभाग का काम रुका
▶️ विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और सरकार की बातचीत से नहीं निकल पा रहा हल

Electricity Workers Strike In UP: उत्तरप्रदेश राज्य खबरों का मुख्य केंद्र बना रहता है। राज्य में बिजली व्यवस्था भी हमेशा एक चुनौती बनी रहती है। इस बीच राज्य के कई जिलों में सोमवार से भारी मात्रा में बिजली की कटौती चल रही है। कटौती का कारण बिजली विभाग (Electricity Department Workers Strike In UP) के कर्मचारियों की हड़ताल है। जिस कारण राज्य के करोड़ों लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं।

पूरा मामला समझिए, आखिर कर्मचारी हड़ताल पर क्यों?

उत्तरप्रदेश के पूर्वांचल विधुत वितरण निगम लिमिटेड(PVVNL) के निजीकरण को लेकर प्रस्ताव लाया गया है। ऊर्जा निगम प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में कर्मचारी (Electricity Workers Strikes In the Leadership Of
Joint conflict committee against Privatization) से लेकर अधिकारी तक कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। संघर्ष समिति के अनुसार उत्तर प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के करीब 15 लाख विधुत कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार किया। निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने शक्ति भवन से जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा भवन तक कैंडल मार्च भी निकाला।

Electricity Workers Strikes In UP Against Privatization

अंधेरे में रहे यूपी के कई जिले

निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार (Boycott Of Privatization In UP) के कारण यूपी के पूर्वी जिलों वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, मीरजापुर समेत कई जिलों में बिजली की सप्लाई प्रभावित रही। इस बहिष्कार का प्रभाव शासन के लोगों पर भी दिखा। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maury, Deputy CM UP), ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, मंत्रियों, करीब 150 विधायकों, विधान परिषद सदस्यों के सरकारी आवास समय राजधानी लखनऊ में भी बिजली की सप्लाई ठप रही।

सोमवार को ही विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के अधिकारियों की सरकार से बैठक हुई लेकिन बैठक से कोई खास हल नहीं निकला। जिस कारण समिति ने आज राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग 25 हजार बिजली कर्मचारियों के साथ आंदोलन करने का ऐलान किया है।

Electricity Workers Strikes In UP Against Privatization

कर्मचारियों की मांग, समझौता का पालन करें सरकार

हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सरकार द्वारा बिजली कर्मचारियों के साथ तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। सरकार द्वारा बिजली विभाग (Electricity Department) को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि 5 अप्रैल 2018 में सरकार और समिति के बीच हुए समझौते का पालन किया जाए।

जानकारी के लिए बता दें कि 5 अप्रैल 2018 को सरकार और बिजली विभाग के कर्मचारियों के संगठनों के बीच ऊर्जा प्रबंधन (Energy Management) के मामले में एक समझौता हुआ था। जिसमें कहा गया था कि सरकार निजीकरण से संबंधित कोई भी फैसला लेने से पहले कर्मचारियों को विश्वास में लेगी और बिना विश्वास में लिए कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार अपने निजीकरण के फैसले से पीछे हटेगी या फिर कर्मचारियों को विश्वास में लेने का प्रयास करेगी। हालांकि आज भी यूपी (UP Latest News) के कई जिलों में हजारों बिजली कर्मचारियों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा रहे है।

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Manoj Thayat

Manoj Thayat

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