Ganesh Chaturthi 2020: प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को कहे ना, मनाए इको फ्रेंडली गणेश महोत्सव

Ganesh Chaturthi 2020: प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को कहे ना, मनाए इको फ्रेंडली गणेश महोत्सव
▶️कोरोना के चलते मनाए घर पर ही इको फ्रेंडली गणेश महोत्सव.
▶️सरकार द्वारा दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर सामूहिक विसर्जन पर लगाया गया प्रतिवंध 
▶️यहाँ जानिए होम मेड गणेश प्रतिमा बनाने के तरीके

Eco Friendly Ganesha on Ganesh Chaturthi 2020: गणेश महोत्सव को लेकर लोगो में बहुत उत्साह देखने को मिलता है। जल्दी ही गणेश महोत्सव की शुरुआत होगी, लोग भगवान गणेश को अपने घर लाने के लिए उत्साहित है। लेकिन सवाल ये है कि कोरोना संकट के चलते किस तरह गणेश महोत्सव का आनंद लिया जाए। कोरोना के चलते लोग इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बना सकते हैं। जिससे पर्यावरण की भी सुरक्षा की जा सके।

Ganesh Chaturthi 2020

कैसे बना सकते हैं Eco Friendly Ganesha ?

इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ़ पेरिस का उपयोग ना करके ऐसे सामान का उपयोग किया जा सकता है जिससे विसर्जन के बाद नदियों को भी कोई नुकसान ना हो, ना ही पानी में रहने वाले जीवों को कोई नुकसान हो। इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमा बनाने के तरीके :

  1. नदियों की मिट्टी को उपयोग करके उनपर नेचुरल रंगो का प्रयोग करे  ।
  2. प्रतिमा बनाने के लिए लाल मिट्टी का उपयोग करे जिसमे विसर्जन के बाद पौधा उगाया जा सकता है।
  3. फिश फ़ूड को प्रतिमा बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है ।
  4. सीड्स बॉल्स (Plants seeds balls) का इस्तेमाल भी प्रतिमा बनाने में किया जा सकता है, विसर्जन के बाद उनका पौधारोपण किया जा सकता है।
  5. चॉकलेट का प्रयोग करके प्रतिमा बनाई जा सकती है ।

अगर हम इन सभी चीजों का उपयोग प्रतिमा बनाने के लिए करे तो इसके द्वारा विसर्जन के बाद होने वाले प्रदुषण को भी रोका जा सकता है।

कैसे बचायी जा सकती है नदियों की स्वच्छता ?

10 दिन की पूजा के बाद जब POP से बनी बड़ी-बड़ी प्रतिमाओं को विसर्जित करने का समय आता है, तब लोग उन्हें नदियों के जल में विसर्जित करते है। लाखों की संख्या में खतरनाक पेंट वाली POP की मूर्तियों और सामग्रियों को नदी और तालाबों में प्रवाहित किया जाता है जिससे पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। जिसकी वजह से कई बार जल जीवों की जान पर भी खतरा होता है।

भक्ति या विनाश ?

अक्सर ऐसा भी देखने को मिला है कि बड़ी-बड़ी प्रतिमा जो नदियों के ऊपरी सतह पर ही रह जाती है उनको क्रेन से तोड़ा जाता है। नदी के किनारे से फेंका जाता है, कचरे के ढेर कि तरह इक्कठा किया जाता है। इन कारणों से नदियों की स्वच्छता, पर्यावरण संतुलन और लोगो की आस्था, सभी को गहरी चोट लगती है। इन सभी कारणों से बचने के लिए इको फ्रेंडली चीजों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

कोरोना संकट के चलते सरकार द्वारा उठाये कदम

इस वर्ष कोरोना के वजह से लोगों में महोत्सव बनाने का उत्साह बहुत कम है । सरकार द्वारा भी इस दिशा में कुछ खास कदम उठाये गए है ।

COVID-19 महामारी के वजह से, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने इस साल गणेश चतुर्थी पर सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी सभाओं, सामुदायिक समारोहों या मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस नियम को तोड़ने वालों पर 50,000 रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा। 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। पिछले साल, दिल्ली सरकार ने लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों पर कृत्रिम तालाब बनवाए थे, ताकि वे मूर्तियों को विसर्जित कर सकें।

Juli Kumari

Juli Kumari

जूली एक सिंपल सी लड़की है जिसे खुद सजना और ख़बरों को अपने शब्दों से सजाना बेहद पसंद है। जूली को राजनीति, लाइफस्टाइल और कविताएं लिखने का भी काफी शौक है। आप The Toss News में जूली के लिखे हुए लेखों को पढ़ सकते हैं और पसंद आए तो शेयर भी कर सकते हैं। और एक राज़ की बात बताऊं? कमेंट कर के या हमारे Social Media Platforms पर मेकअप और हेयरस्टाइल टिप्स भी ले सकते हैं।