ईद-उल-अजहा पर पीएम मोदी ने दी सभी देशवासियों को ईद की मुबारकबाद, जाने कबसे से शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला

ईद-उल-अजहा पर पीएम मोदी ने दी सभी देशवासियों को ईद की मुबारकबाद, जाने कबसे से शुरू हुआ कुर्बानी का सिलसिला
▶️पीएम मोदी (PM Modi) और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने लोगों को ईद-उल-अजहा (Eid-Ul-Ajha 2020) की मुबारकबाद दी है
▶️ईद उल अजहा (Eid-Ul-Ajha 2020) पर सभी देशवासियों को बधाई, आज का दिन हमें न्यायपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए जागरूक करता है- पीएम मोदी (PM Modi)
▶️अल्लाह ने इस दिन हज़रत इब्राहिम से उनकी सबसे प्यारी चीज मांग ली थी

Eid-Ul-Ajha 2020: आज दुनियाभर में बकरीद (Bakrid 2020) का त्योहार मनाया जा रहा है। मुस्लिम समुदाय (Muslim Community Festival) का ये बेहद खास पर्व है जिसमें अल्लाह के प्रति प्रेम व स्नेह दर्शाने के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज़ को कुर्बान करना होता है। इस खास अवसर पर पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi Wish On Bakrid 2020) ने सभी को बकरीद की मुबारकबाद दी है।

Eid-Ul-Ajha 2020: पीएम मोदी ने दी बकरीद की मुबारकबाद

देशवासियों को पीएम मोदी (PM Modi News) का ये अंदाज काफी पसंद आता है। जब पीएम हर छोटे-बड़े त्योहार के दिन अपनी सुबह की शुरूआत सभी लोगों को शुभकामनाएं देकर करते हैं। होली हो या दिवाली, ईद हो चाहे रमजान, पीएम मोदी (PM Modi Wish On Bakrid) हर पर्व पर देशवासियों को प्यार भरी शुभकामनाएं देते हैं। औऱ इस बार भी पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने लोगों को ईद-उल-अजहा (Eid-Ul-Ajha 2020) की मुबारकबाद दी है।

Eid-Ul-Ajha 2020: पीएम को ट्वीट

आज के खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PrimeMinister Narendra Modi) ने शुभकामनाएं देते हुए लिखा है कि, ईद उल अजहा (Eid-Ul-Ajha Wishes) पर सभी देशवासियों को बधाई। आज का दिन हमें न्यायपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और समावेशी समाज बनाने के लिए जागरूक करता है। ऐसे ही भाईचारे और करुणा की भावना बनी रहे।”

PM Modi Wishes On Eid-Ul-Ajha 2020

Eid-Ul-Ajha 2020: इस्लाम धर्म में बकरीद का महत्व

मुस्लिम धर्म (Muslim Religon) में बकरीद (Bakra-Eid) का बेहद खास महत्व माना गया है। कहा जाता है कि एक बार अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम (Hazrat Ibrahim) से उनकी सबसे प्यारी चीज मांग ली थी। हालांकि अल्लाह उनकी परिक्षा ले रहे थे, लेकिन फिर भी हज़रत इब्राहिम ने अपने सबसे अज़ीज़ बेटे हज़रत ईस्माइल को अल्लाह के लिए कुर्बान करने का फैसला ले लिया। उसके बाद हज़रत बेटे की गुर्बानी देने के लिए आगे बढ़ें और आंखे बंद करके अपने बेटे की गर्दन दाब चला दिया। लेकिन अल्लाह की कृपा ऐसी बरसी की जब हज़रत ने आंखे खोली तो उन्होने देखा कि उनका बेटा बिल्कुल सही सलामत है।

अल्लाह ने उस क्षण हज़रत के बेटे की जगह एक बकरी को भेज दिया और दाब बकरी की गर्दन पर चल गई। इसके बाद से ही लोग इस त्योहार को अल्लाह की कृपा के रूप में मनाते हैं और तब से ही बकरीद (Bakra-Eid) पर कुर्बानी शुरू हो गई।

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