मुसलमानों से नफ़रत करते थे बाला साहेब ठाकरे, पुण्यतिथि पर जानें उनके अस्तित्व से जुड़ी 5 ज़रूरी बातें

मुसलमानों से नफ़रत करते थे बाला साहेब ठाकरे, पुण्यतिथि पर जानें उनके अस्तित्व से जुड़ी 5 ज़रूरी बातें
▶️शिवसेना का गठन करने वाले संस्‍थापक बालासाहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) की आज 8वीं पुण्‍यतिथि मनाई जा रही है
▶️17 नवंबर 2012 को बाला साहेब ठाकरे ने दुनिया को अलविदा कह दिया था
▶️बाला साहेब ठाकरे की छवि एक हिंदूवादी नेता के रूप में थी इसलिए वो मुसलमानों को पसंद नहीं करते थे

8th Death Anniversary Of Bala Saheb Thackeray: आज सुबह से ट्विटर पर #BalasahebThackeray ट्रेंड कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज शिवसेना का गठन करने वाले संस्‍थापक बालासाहेब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) की पुण्‍यतिथि है। सुबह से ही लोग बाला साहेब ठाकरे को अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

बाला साहेब ठाकरे की 8वीं पुण्यतिथि

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना (Shivsena Maharashtra) की स्थापना करने वाले बाल केशव ठेकरे का जन्म मराठी परिवार में 23 जनवरी 1926 को हुआ था। बाला साहेब ने अपनी पहचान एक कद्दावर राजनेता के रूप में बनाई और सालों तक सेवा देने के बाद 17 नवंबर 2012 को उनका निधन हो गया था, आज 17 नवंबर 2020 को बाला साहेब ठाकरे की 8वीं पुण्‍यतिथि मनाई जा रही है।

बाला साहेब ठाकरे के बारे में 5 ज़रूरी बातें

बाला साहेब ठाकरे साहेब एक कद्दावर नेता तो थे हि लेकिन समाज में उनकी छवि हमेशा कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी नेता (Hindu Nationalist Leader) की रही है। इसके अलावा ठाकरे साहेब के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो उन्हे दबंग नेता बनाती है, तो आइए जानते हैं।

  1. पत्रकार थे बाला साहेब

दरअसल समाज में ठाकरे साहेब को लोग कट्टर हिंदू राष्ट्रवादी नेता के रूप में जानते थे, लोग उनकी आवाज से ही कांप उठते थे। नेता से पहले बाला साहेब एक कार्टूनिस्ट थे और एक अंग्रेजी अखबार दैनिक द फ्री प्रेस जर्नल इन बॉम्बे (The Free Press General In Bombay) में काम किया था, राजनीति में आने के बाद उन्होने पत्रकारिता को अलविदा कह दिया।

2. मदद के लिए तैयार रहते थे ठाकरे

बाला साहब ठाकरे भले ही एक कट्टर राजनेता के रूप में जाने जाते थे लेकिन जनता के लिए हमेशा उनके मन में मान- सम्मान हुआ करता तो, वो अक्सर जनता की मदद के लिए तैयार रहते थे चाहे वो मराठी हो या गैर मराठी। जब बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त (Sanjay Dutt TADA case) टाडा कानून के तहत फंस गए थे तब बाला साहेब ने ही उन्हे इस मुसीबत से बाहर निकाला था।

8th Death Anniversary Of Bala Saheb Thackeray

3. मुसलमानों को पसंद नहीं करते थे ठाकरे साहेब

इस बात को तो हम बता ही चुके हैं कि बालासाहेब ठाकरे की छवि एक हिंदूवादी नेता के रूप में थी इसलिए वो मुसलमानों को पसंद नहीं करते थे। 80 के दशक में उन्होंने कहा था कि देश में मुसलमान कैंसर की तरह फैल रहे हैं। देश को मुसलमानों से आजाद कराना बहुत ज़रूरी है।

4. खड़ी बोली के कारण गिरफ्तार हुए थे बाल केशव

बाला साहेब ठाकरे हमेशा से मुसलमानों का विरोध करते आए थे, बाबरी ढांचे (Babari Masjid) के विध्वंस के बाद भी बाल ठाकरे ने मुस्लिमों के खिलाफ एक भाषण दे दिया था, जिसके बाद उनके ऊपर केस दर्ज हुआ था कि वो दंगा भड़काने का काम कर रहे हैं। दंगों के कारण ठाकरे को 25 जुलाई सन 2000 में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उनके सपोर्ट में पूरी मुंबई उठ खड़ी हुई और उन्हे अदालत ने रिहा कर दिया।

5. चुनाव लड़ने पर लगा था प्रतिबंध

दरअसल ठाकरे एक हिंदूवादी नेता थे जिसके कारण लोगों को लगता था कि वो डर की राजनीति करते हैं। जिसकी वजह से उनके चुनाव लड़ने पर 6 साल तक प्रतिबंध लगा दिया गया था।

ऐसी तमाम बातें हैं जिससे ये पता लगता है कि बाला साहेब ठाकरे एक कद्दावर नेता ही नहीं बल्कि एक दबंग नेता भी थे। चुनाव के समय पूरा महाराष्ट्र उनके साथ खड़ा हो जाता था। आज बाला साहेब की 8वीं पुण्यतिथि पर उन्हे भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

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Mahima Nigam

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महिमा एक चंचल स्वभाव कि लड़की है और रियल लाइफ में खेलकूद करने के साथ इन्हें शब्दों के साथ खेलना भी काफी पसंद है। बता दें कि इस वेबसाइट को शुरू करने का सपना भी महिमा का है और उसे मंज़िल तक पहुंचाने का भी। उम्मीद करते हैं कि आप साथ देंगे

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