Nirjala Ekadashi 2020: जानें पूजा की विधि, लाभ और सही मुहूर्त

Nirjala Ekadashi 2020: जानें पूजा की विधि, लाभ और सही मुहूर्त
▶️ निर्जला एकादशी बाकी सारी एकादशियों की अपेक्षा में बहुत महत्वपूर्ण है। 
▶️ ऐसा माना जाता है कि इस एकादशी का व्रत रखने से सारे पाप धुल जाते हैं। 
▶️ इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। 

यूँ तो भारतीय संस्कृति में कई एकादशियों को माना जाता है। लेकिन निर्जला एकादशी व्रत (Nirjala Ekadash) के लिए कहा जाता है कि इससे वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य मिलता है। इसलिए इस एकादशी का महत्व भी बहुत अधिक है। तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं निर्जला एकादशी को करने की विधि,  कैसे रखें व्रत, क्या है इसका महत्व और लाभ? 

यहाँ पर जानें किस विधि से करना है निर्जला एकादशी का व्रत

  •  निर्जला एकादशी की शुरुआत सुबह उठकर स्नान करने के बात सर्वप्रथम भगवान विष्णु की पूजा से करें। 
  • इसके बाद आपको मन को शांत रखकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप कुछ देर तक के लिए करना है। 
  • शाम होते ही भगवान विष्णु की एक बार फिर से पूजा करें और रात में भगवान को याद करते हुए जमीन पर आराम करें याद रखें कि आपको बिस्तर का उपयोग नहीं करना है। 
  • एकादशी के दूसरे दिन यानी 3 जून बुधवार को आपको किसी ब्राह्मण को भोजन करवाना है। तथा अनाज कपड़े जूते पंखा आसन फलों आदि का दान करना है। 
  •  इन सब प्रक्रियाओं के बाद ही भोजन को ग्रहण करें। बता दे कि अगर आप इस एकादशी में व्रत रखती है तो अन्य 23 एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है। 
  •  जो भी व्यक्ति इस एकादशी का व्रत रखता है वह सारे पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

क्या है निर्जला एकादशी का मुहूर्त? 

निर्जला एकादशी 1 जून को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से शुरू होगी और 2 जून को 12 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। जिसकी वजह से व्रत रखने वाला या वाली भगवान श्रीविष्णु की पूजा दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक कर सकते हैं।

व्रती को बिना लहसुन और प्याज वाला खाना खाना चाहिए। रात में बिस्तर की जगह धरती पर सोना चाहिए। अगले दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सबसे पहले श्रीहरि का स्मरण करें। इसके बाद नित्यकर्मों से निवृत होकर स्‍नान के पानी में गंगाजल डालकर स्‍नान करें। अब आचमन कर व्रत संकल्प लें। फिर पीला वस्त्र (कपड़े) पहनें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें।

इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है

एक बार जब महर्षि वेदव्यास पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे। तब महाबली भीम ने उनसे कहा- पितामह। आपने प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या, एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता- मेरे पेट में वृक नाम की जो अग्नि है, उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्य व्रत से वंचित रह जाऊंगा?

तब महर्षि वेदव्यास ने भीम से कहा- कुंतीनंदन भीम ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो और तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल प्राप्त होगा। नि:संदेह तुम इस लोक में सुख, यश और मोक्ष प्राप्त करोगे। यह सुनकर भीमसेन भी निर्जला एकादशी का विधिवत व्रत करने को सहमत हो गए और समय आने पर यह व्रत पूर्ण भी किया। इसलिए वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है।

जानिए निर्जला एकादशी का महत्व

  •  अगर आप इस एकादशी में व्रत रखते हैं तो अन्य सभी एकादशी ओका आपको फल प्राप्त होता है। 
  • और जो फल इस एकादशी में मिलता है वह सभी तीर्थों और दानों से कई गुना ज्यादा है। ऐसा कहा जाता है कि 1 दिन पानी ना पीने से व्यक्ति के सारे पापों का नाश हो जाता है। 
  • जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है वह नरक में ना जाकर पुष्पक विमान से स्वर्ग को जाता है। 
  • व्रती चारों पुरुषार्थ यानी धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को प्राप्त करता है।
  • व्रत भंग दोष- शास्त्रों के मुताबिक अगर निर्जला एकादशी करने वाला व्रती, व्रत रखने पर भी भोजन में अन्न खाए, तो उसे चांडाल दोष लगता है और वह मृत्यु के बाद नरक में जाता है।

Mahima Nigam

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महिमा एक चंचल स्वभाव कि लड़की है और रियल लाइफ में खेलकूद करने के साथ इन्हें शब्दों के साथ खेलना भी काफी पसंद है। बता दें कि इस वेबसाइट को शुरू करने का सपना भी महिमा का है और उसे मंज़िल तक पहुंचाने का भी। उम्मीद करते हैं कि आप साथ देंगे