भारत में रेप केसों की सच्चाई, आंकड़े डराने वाले

भारत में रेप केसों की सच्चाई, आंकड़े डराने वाले
▶️ नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो के अनुसार 2019 में अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 87 केस के सामने आते हैं
▶️ भारत में अप्रैल 2019 रिपोर्ट बताती है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध 7.3% बढ़ा है
▶️ एनसीबी के अनुसार, अपराधियों को सजा मिलने की दर केवल 27.2% है

NCRB Latest Report On Rape Cases In India: भारत में हमेशा ही नेताओं द्वारा महिलाओं को आगे बढ़ाने की बात कही जाती है। उनकी सुरक्षा को लेकर अनेक तरह के बंदोबस्त और कड़े कानून (Strict Law For Women Security) की बात होती है। लेकिन वास्तविक सच्चाई और आंकड़े इन तमाम दावों से अलग हैं। इस रिपोर्ट में आप आंकड़ों के अनुसार समझेंगे कि आखिर भारत में महिला सुरक्षा की वास्तविक स्थिति क्या है!

आंकड़ों की ज़ुबानी

NCRB के आंकड़ों (NCRB Latest Report On Rape) के मुताबिक, 2017 में देश में रेप के कुल मामले 32,559 दर्ज हुए। जबकि 2018 में यह संख्या 33,356 थी। 2019 में अब तक एनसीबी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में औसतन 1 दिन में 87 रेप के सामने आ रहे हैं। साल के शुरुआती 9 महीनों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की कुल संख्या 4,05,861 दर्ज हुए हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार ये आंकड़े 2018 से 7 फ़ीसदी अधिक है।

NCRB Report On Rape Case In India

बच्चियों के साथ बढ़ते अपराध

महिलाओं के खिलाफ होने वाले इन अपराधों के आंकड़े डराने वाले निश्चित तौर पर हैं। स्थिति और भी भयावह तब लगती है जब आंकड़े स्वयं कहते हैं कि उनमें से अधिकतम अपराध के मामलों में बच्चे भी शामिल हैं।

एनसीआरबी (NCRB Report 2020) के आंकड़ों को देखने के पश्चात पता लगता है कि बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2018 के मुकाबले 2019 में बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों में 4.5 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। साल 2019 की ही बात करें तो बच्चियों के खिलाफ अपराध के 1.48 लाख केस दर्ज हुए। जिनमें से 46.6 फीसदी अपरहण और 35.3 फीसदी यौन दुष्कर्म के मामले थे।

NCRB Report On Rape Case In India

कितनों को मिल पाता है न्याय?

2012, दिल्ली में पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया (Nirbhaya Gangrape Case) के साथ दुष्कर्म की खबर से आप सभी परिचित होंगे। निर्भया को लगभग 7 साल, 3 महीने और 4 दिन के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला था। इस उदाहरण से महिलाओं के साथ यौन शोषण के मामलों में कितनी जल्दी न्याय मिल पाता है, इसका जवाब आपको मिल ही गया होगा।

आंकड़ों की सुनिए, 2017 के अंत तक अदालत में 1 लाख 27 हजार 8 सौ (More Than 1 Million Cases at the End Of 2017) से अधिक मामले लंबित पड़े थे। 2012 में लंबित आंकड़ों की संख्या 1 लाख 13 हजार थीं।

NCRB Report On Rape Case In India

2002 से 2011 के बीच केवल 26% मामलों में ही अदालतों द्वारा फैसला सुनाया गया। 2012 के बाद आंकड़े थोड़ा सुधरे परंतु 2016 के बाद फिर से यह आंकड़ा 25 फ़ीसदी तक पहुंच गया। 2017 में यह आंकड़ा 32% के आसपास रहा है।

‘The toss news’ की इस रिपोर्ट को पढ़ने के पश्चात आप समझ गए होंगे कि देश में हर दिन करीब 87 ‘निर्भया’ के साथ हैवानों द्वारा दुष्कर्म किया जाता है। ‘the toss news’ आपके लिए तत्कालीन मामलों के ऊपर इस तरह की कड़वी सच्चाई और आंकड़ों की जुबानी के माध्यम से वास्तविक रिपोर्ट्स को आपके सम्मुख लाते रहेगा।

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Manoj Thayat

Manoj Thayat

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