Nag panchami special : नागों की पूजा से होंगे भगवान शिव और विष्णु प्रसन्न, जानिए क्या है इस दिन पूजन का महत्व

Nag panchami special : नागों की पूजा से होंगे भगवान शिव और विष्णु प्रसन्न, जानिए क्या है इस दिन पूजन का महत्व
▶️ Nag Panchami Special: नागपंचमी पर नांगों की पूजा करने और दूध दान करने से बरसेगी भगवान शिव की कृपा, झारखंड में मिलते हैं सबसे जहरीले सांप
▶️ इस त्योहार के पीछे है लंबी कहानी, डसने के बाद भी इंसान को जिंदा कर देते हैं सांप
▶️ नागपंचमी पर पूजन से मिलेगा मनवांछित फल और पूरी होंगी सारी मनोकामना

नागपंचमी (Nag Panchami Special) का त्योहार पूरे उत्तर भारत (North India Festival) में धूमधाम से मनाया जाता है। हिन्दू धर्मग्रंथों (Hindu Dharmgrantho) के अनुसार नागों को पूजनीय माना गया हैं और उन्हें देवों की उपाधि दी गई हैं। नाग भगवान शिव (Lord Shiv) के गले पर गहने की तरह सुशोभित होते हैं जिस कारण उन्हें नागेश्वर (Nageshwar Baba) भी कहा जाता हैं। वहीं भगवान विष्णु शेषनाग के उपर विराजमान हैं जिस कारण आज के दिन का खास महत्व है। मान्यता के अनुसार आज के दिन सर्पो की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति का आगमन होता है।

Nag Panchami Special: कब मनाया जाता है नागपंचमी का त्योहार?

नागपंचमी (Nag Panchami 2020) का त्योहार भगवान शिव को समर्पित सावन के महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता हैं। आज के दिन नागों कि पूजा से जीवन की सारी समस्याओं का अंत हो जाता हैं। सर्पो को देव रूप में पूजने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती हैं। इसीलिए आज के दिन नागों को दूध दान करना चाहिए। आज के दिन तक्षकनाग (Tashaknag), वसुकिनाग (Vasukinag), शेषनाग (Shehnag) आदि की पूजा की जाती हैं इसके अतिरिक्त आज के दिन काल सर्प दोष (Kaal Sharp Dosh) की पूजा भी की जाती है।

Nag Panchami Special: नागपंचमी की पूजन विधि

नाग पंचमी की पूजा विधि (Nag Panchami Pujan Vidhi) बहुत ही सरल है। आज के दिन सुबह-सुबह जल्दी स्नान करके घर के दरवाजे पर दोनों तरफ खड़िया से लीपकर उस पर कोयले से सांपो का चित्र बनाएं, अपने मन में व्रत करने का संकल्प लें और पूजा स्थान पर चौकी लगाकर नाग देवता की प्रतिमा (Nag Panchami Photo) को स्थापित करें जिस पर चंदन, रोली हल्दी, अक्षत पुष्प आदि चढ़ाकर पूजा करें। फिर नाग देवता (Nag Panchami Special) का ख़ीर, दूध आदि से भोग लगाएं। और नाग देवता से मन की मुराद मांगे।

Nag Panchami Special: Nag Panchami Photo
Nag Panchami Special : Nag Panchami Photo

Nag Panchami Special: नागपंचमी की व्रत कथा

नागपंचमी की कथा (Nag Panchami Katha) इस प्रकार है, बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में एक किसान रहता था जिसकी एक पत्नी और दो पुत्र व एक पुत्री थी। किसान अपना जीवन हंसी खुशी जी रहा था, लेकिन एक दिन उसके हल से एक नागिन के दो बच्चे मर गए, जिस पर बच्चों की मां नागिन को बेहद गुस्सा आया और उसने प्रतिशोध लेने का निर्णय लिया।

रात के समय जब सब सोए हुए थे तो नागिन ने आकर उस किसान के दोनों पुत्रों को डस लिया जिसके कारण उसकी मृत्यु हो गई अब किसान बेहद दुखी रहने लगा और जब अगले दिन नागिन किसान की बेटी को डसने के लिए आई तब उसने देखा कि उसकी बेटी ने एक कटोरी में दूध भर के रखा हुआ था और वह उस नागिन से क्षमा मांग रही थी जिसको देखकर नागिन बेहद प्रसन्न हुई और किसान को क्षमा कर उसके दोनों पुत्रों को जीवित कर दिया, और आशीर्वाद देकर अपने रास्ते आगे बढ़ गई।

मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और नाग देवता (Nag Panchami 2020) भी प्रसन्न होते हैं आज के दिन जो भी व्यक्ति नाग देवता की सच्चे मन से पूजा करता है उसको नाग देवता अच्छा फल देते हैं।

झारखंड में मिलते हैं सबसे ज़हरीले सांप

भारत के झारखंड राज्य में सबसे जहरीले सांप पाए जाते हैं यह कई किस्मों के हैं। इन विषेलें सांपो में कॉमन करैत (Common Krait), रसेल वाइपर (Russell’s Viper), बैंडेड करैत (Banded Krait), कोबरा (Kobra), पिट वाईपर (Pit Viper), हैं इसमें सबसे आम कोबरा है जो कई जगहों में आमतौर पर मिल जाता है। कोबरा का हिंदू मान्यताओं में भी खास महत्व है। सांप सबके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हमारे पर्यावरण में भी संतुलन बना कर रखते हैं। और आज के दिन इनका खास महत्व हैं।

आगे की खबर के लिए बने रहे The Toss News के साथ

ये भी पढ़े :

Diksha Gupta

Diksha Gupta

दीक्षा उन लेखकों में से हैं जिनको शब्दों से बेहद प्यार हैं। और इन शब्दों को खूबसूरत तरीके से पन्ने पर उतारना दीक्षा को काफ़ी पसंद है। आप सब तक ख़बरें पहुंचाने के अलावा दीक्षा को कविताएं लिखना भी पसंद है। शौक की बात करें तो दीक्षा डांस में भी रूचि रखती हैं। और एक ऐसी लड़की हैं जिन्हें नई चीज़ें सीखने में मज़ा आता है। दीक्षा का मानना है की वह लक्ष्य कि प्राप्ति के लिए ही ईश्वर पर और खुद पर विश्वास करना पसंद करती हैं.