लालजी टंडन के जीवन से जुड़ी पांच अहम बाते जो बयान करती उनके विशाल राजनैतिक व्यक्तित्व को

लालजी टंडन के जीवन से जुड़ी पांच अहम बाते जो बयान करती उनके विशाल राजनैतिक व्यक्तित्व को
▶️ Lalji Tandon: संघ से था गहरा जुड़ाव जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी से हुयी थी उनकी मुलाकात।
▶️राजनीति की सबसे छोटी इकाई से शुरू की थी सियासत की पारी।
▶️टंडन (Lalji Tandon Death News) की छवि बेदाग और निष्पक्ष नेता के रूप में जानी जाती थी।

21 जुलाई दिन मंगलवार को मध्यप्रदेश ने अपने राज्य्पाल और बीजेपी ने अपने प्रिय लालजी टंडन (Lalji Tandon Death News) को हमेशा के लिए खो दिया। लालजी टंडन (Lalji Tondon) के जीवन से हमेशा के लिए अलविदा लेने की जानकारी उनके बेटे आशुतोष टंडन (Ashutosh Tandon) ने ट्विटर के ज़रिये ‘बाबूजी नहीं रहे’ लिखकर दी। तो ऐसे में आज हम आपको लालजी टंडन (Lalji Tandon News) के जीवन के उन पहलुओं से रूबरू करवाने जा रहें हैं जिन्हें जानकर आप भी कहेंगे, क्या कमाल के व्यक्ति थे लालजी टंडन (Lalji Tandon BJP)।

Source: Bhaskar.com

राजनीति की सबसे छोटी इकाई से शुरू करा सियासी दंगल

भारत मे राजनीति की सबसे छोटी इकाई पार्षद के चुनाव को माना जाता है लालजी टंडन (Lalji Tandon) ने अपने जीवन की पहली सियासत की सीढ़ी इसी पायदान से चढ़नी शुरू की थी। 1960 में टंडन पहली बार पार्षद पद का चुनाव जीते थे। लालजी (Lalji Tandon) इसके बाद लगातार तीन बार विधायक भी बने रहे। टंडन, कल्याण सिंह सरकार (Kalyan Singh Goverment) में राज्य मंत्री भी रहे। यूपी विधानसभा (UP Vidhansabha) में टंडन ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभायी थी ।

12 साल की उम्र से ही Lalji Tandon संघ की शाखा से जुड़ गए थे

संघ की शाखाओं में टंडन (Lalji Tandon Death News) अपनी सहभागिता 12 वर्ष की आयु से देने लगे थे। संघ से जुड़ाव रखने की वज़ह से उनकी मुलाकात अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) से हुई थी।

निष्पक्ष फैसलों के लिए जाने जाते थे Lalji Tandon

लालजी टंडन (Lalji Tandon) हमेशा अपने निष्पक्ष फैसलों के लिए जाने जाते थे। राजनैतिक इतिहास मे बेदाग थी उनकी छवि। मध्यप्रदेश में राजनैतिक युद्ध के बाद 22 विधायकों का इस्तीफा और कमलनाथ सरकार (Kamalnath Goverment) का अंत भी हुआ लेकिन राज्यपाल के रूप में टंडन की भूमिका निष्पक्ष बनी रही।

अचंभित करने वाली थी कार्यशैली

टंडन (Lalji Tandon) का जुड़ाव हमेशा से ही आम जनता से रहा था जिसके चलते टंडन ने राजभवन की व्यवस्थाओं में कई बदलवा किए थे। लालजी टंडन (Lalji Tondon Governer) ने आम जनता के लिए राजभवन के दरवाजे भी खोल दिए थे। और खेती को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर राजभवन मे होती थी किसानो के साथ चर्चा भी किया करते थे। टंडन (Lalji Tandon Death) मीडिया से भी अपनी बात बड़े बेबाकी के साथ रखते थे जिसके चलते उनके व्यक्तित्व की पहचान बाकी राजनेताओं से अलग थी

laalji tondon with atal ji
Source: Indiatv.in

Atal Bihari Vajpayee को मानते थे पिता तुल्य

टंडन और वाजपेयी की मुलाकात संघ की शाखा में हुयी थी जहां अटल उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हुए थे इसके बाद जब अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने लखनऊ की सीट को त्यागा तब उत्तराधिकारी के रूप मे सब ने टंडन (Lalji Tandon Death News) को पाया। टंडन हमेशा अपनी बातों मे अटल बिहारी वाजपेयी को अपना गुरु, पिता, भाई ही मानने की बात स्वीकारते थे।

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