5 पॉइंट्स में जानें क्या होती है न्यायिक हिरासत, जिसके तहत अर्नब को हुई 14 दिन की जेल….

5 पॉइंट्स में जानें क्या होती है न्यायिक हिरासत, जिसके तहत अर्नब को हुई 14 दिन की जेल….
▶️गिरफ्तारी के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है
▶️कोर्ट ने कहा पुलिस हिरासत के लिए उचित सबूत की जरूरत होती है जो पुलिस पेश नहीं कर सकी है
▶️जो व्यक्ति पुलिस हिरासत से मुक्त होकर न्यायालय के आदेश के बाद जेल पहुंचता है तो उसे न्यायिक हिरासत कहते हैं

Arnab Goswami Judicial Custody: रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को बुधवार मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया। इस गिरफ्तारी में हुए हाईवोल्टेज ड्रामें के बाद दोपहर करीब 1 बजे अर्नब को अदालत में पेश किया गया जहां अर्बन औऱ पुलिस ने अपना-अपना पक्ष रखा। इस आरोप-प्रत्यरोप में पुलिस ने अदालत में कहा कि अर्नब गिरफ्तारी (Arnab Goswami Arrest) के समय सहयोग नहीं कर रहे थे।

अदालत ने क्या कहा?

पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप के बाद कोर्ट ने कहा कि पुलिस हिरासत के लिए एक ठोस सबूत की ज़रूरत होती है औऱ ऐसा कोई सबूत पुलिस पेश नहीं कर पाई है, ऐसे में कोर्ट ने पुलिस हिरासत की अपील ख़ारिज कर दी और अर्नब को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Arnab Goswami In 14 Day Judicial Custody) में भेज दिया गया।

Arnab Goswami Judicial Custody Know What Is Judicial Custody

पांच पॉइंट्स में जाने क्या होती है न्यायिक हिरासत?

सबूतों पर बात करते हुए कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami Editor-In-Cheif Republic Tv) और 2 अन्य आरोपियों को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है…तो आइए आसान शब्दों में समझें कि क्या होती है न्यायिक हिरासत (What Is Judicial Custody?) जिसके तहत 14 दिनों के लिए अर्नब को जेल हुई है….

  1. नियम के अनुसार यदि पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है तो बिना सुनवाई के वो 24 घंटे से ज्यादा अभियुक्त को अपनी गिरफ्त में नहीं रख सकती, 24 घंटे के अंदर ही पुलिस आरोपी को लेकर मजिस्ट्रेट के पास पहुंचेगी। इस दौरान मजिस्ट्रेट के पास दो विकल्प होते हैं, एक पुलिस हिरासत की और दूसरा न्यायिक हिरासत (Judicial Custody vs Police Custody) की।

2.तमाम सबूतों और पक्ष-विपक्ष की बातें सुनने के बाद मजिस्ट्रेट इन दोनों में से कोई भी हिरासत चुन सकते हैं। कोर्ट के पास ये अधिकार होता है कि उसे जो भी दंड सही लगता है वो उसे गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के लिए चुन सकता है।

  1. जो व्यक्ति पुलिस हिरासत से मुक्त होकर न्यायालय के आदेश के बाद जेल पहुंचता है तो उसे न्यायिक हिरासत कहते हैं। न्यायित हिरासत (Judicial Custody) में पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति से गिरफ्तार हुए व्यक्ति को छू तक नहीं सकती है।

4.वहीं यदि व्यक्ति पुलिस हिरासत (Police Remand) में जाता है तो पुलिस अपनी मर्जी से किसी भी समय व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है। क्योंकि इस दौरान व्यक्ति पुलिस स्टेशन में बंद होता है।

  1. न्यायिक हिरासत में पहली कस्‍टडी की समयसीमा 15 दिन तय की गई है, लेकिन मजिस्‍ट्रेट के पास ये अधिकार होता है कि वो इसकी समयसीमा में बदलाव कर सकती है।

इन्ही पॉइंट्स के आधार पर रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जानकारी के अनुसार कोर्ट में पहुंचने के बाद अर्नब खूब चिल्ला रहे थे और आरोप लगा रहे थे कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है, तब कोर्ट ने अर्नब को फटकार लगाई और चुप होकर बैठने के लिए कहा था, जिसके बाद शांतिपूर्ण तरीके से ये फैसला लिया गया है।

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Juli Kumari

Juli Kumari

जूली एक सिंपल सी लड़की है जिसे खुद सजना और ख़बरों को अपने शब्दों से सजाना बेहद पसंद है। जूली को राजनीति, लाइफस्टाइल और कविताएं लिखने का भी काफी शौक है। आप The Toss News में जूली के लिखे हुए लेखों को पढ़ सकते हैं और पसंद आए तो शेयर भी कर सकते हैं। और एक राज़ की बात बताऊं? कमेंट कर के या हमारे Social Media Platforms पर मेकअप और हेयरस्टाइल टिप्स भी ले सकते हैं।

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