Munshi Premchand Jayanti: परिवार का भूख मिटाने के लिए किताबें और कोर्ट बेच देने वाले मुंशी प्रेमचंद्र के संघर्ष की कहानी

Munshi Premchand Jayanti: परिवार का भूख मिटाने के लिए किताबें और कोर्ट बेच देने वाले मुंशी प्रेमचंद्र के संघर्ष की कहानी
▶️Munshi Premchand Jayanti: मुंशी प्रेमचंद एक लोकप्रिय उपन्यासकार थे, इनका असली नाम धनपत राय था,जिसे बदलकर उन्होने मुंशी कर लिया
▶️मुंशी प्रेमचंद्र का जन्म 31 जुलाई, 1880 को हुआ था, मूल रूप से प्रेमचंद्र बनारस के लमही नाम के एक गांव में रहते थे
▶️मुंशी प्रेमचंद ने करीब 300 लघु कथाएं और लगभग 14 उपन्यास साथ ही कई सारे निबंध व पत्र लिखकर हिंदी साहित्य को रौशन किया है

अगर आप हिंदी के छात्र रहे हैं तो आपने मुंशी प्रेमचंद्र (Munshi Premchand Hindi Upanyaskar) के बारे में तो ज़रूर पढ़ा होगा। प्रेमचंद्र (Munshi Premchand Jayanti) एक ऐसे उपन्यासकार हैं जिनकी कहानी अगर आपने एक बार बढ़ ली तो वो आपके दिल और दिमाग पर बस जाता है। लेकिन आज मुंशी प्रेमचंद्र के बारे में बात करने के पीछे एक बड़ा कारण ये है कि आज लोकप्रिय लेखक प्रेमचंद्र (Munshi Premchand Jayanti) की जयंती है।

Munshi Premchand Jayanti: कौन हैं मुंशी प्रेमचंद्र?

मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand Real Name) एक लोकप्रिय उपन्यासकार थे। इनका असली नाम धनपत राय बताया जाता है। प्रसिद्ध लेखक के नाम से जाने जाने वाले मुंशी प्रेमचंद्र (Munshi Premchand Birth) का जन्म 31 जुलाई, 1880 को हुआ था। मूल रूप से प्रेमचंद्र बनारस के लमही नाम के एक गांव में रहते थे। बताया जाता है कि प्रेमचंद्र के एक बहुत करीबी मित्र थे जिनका नाम मुंशी दयानारायण निगम था, प्रेमचंद्र ने अपने दोस्त की बात मानकर अपना नाम बदल लिया और धनपत राय को बदलकर प्रेमचंद उपनाम कर लिया।

Munshi Premchand Jayanti: हिंदी साहित्य में प्रेमचंद्र का आगमन

मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand Jayanti) एक कुशल वक्ता थे। उनकी कहानियां हिंदी साहित्य (Munshi Premchand: Hindi Sahitya Ka Dharohar) के लिए एक धरोहर है। जो पाठकों को पूरी सदी से जोड़े रखती है। प्रेमचंद्र एक ऐसे लेखक हैं जिनके सहयोग के बिना आपके लिए हिंदी का अध्ययन अधूरा माना जाएगा। हमें आज भी याद है जब हमें स्कूल में मुंशी प्रेमचंद्र की कहानियां (Munshi Premchand Stories) पढ़ाई जाती थी तो पूरी कक्षा मंत्रमुग्ध होकर सूनती थी। मानों शब्दों में इनती गहराई है कि एक कहानी हमें असल का आइना दिखा रही हो। आंखों के आगे वो सम्पूर्ण छवी खुद ही बन जाती थी।

Munshi Premchand Jayanti: बेहद कष्टदाई था प्रेमचंद्र का बचपन

बता दें कि मुंशी प्रेमचंद्र (Munshi Premchand) का बचपन काफी कष्टों में बीता था। जब प्रेमचंद्र 7 साल के थे तब ही उनकी माता जी का निधन हो गया और उनके पिता ने गोरखपुर में दूसरी शादी कर ली। मुंशी को कभी भी उनकी दूसरी मां से प्यार नहीं मिला। औऱ अंत में जब वो 14 साल के थे तब उनके पिता जी (Munshi Premchand Father) चल बसे। इस तरह से प्रेमचंद्र का बचपन 7 साल की उम्र में ही खो गया, औऱ वो मुसीबतों के पहाड़ तले दब गए।

Munshi premchand
Source: The Indian Wire

कहा जाता है कि पिता के देहांत के बाद मुंशी प्रेमचंद्र (Munshi Premchand Jayanti) के ऊपर पूरे घर का बोझ आ गया। औऱ इनती छोटी उम्र में उनके लिए घर चालाना काफी मुश्किल हो गया था। ऐसे में पढ़ने के शौकिन होने के बाद भी प्रेमचंद्र (Munshi Pemchand Books) को अपनी सारी किताबें बेचनी पड़ी थी।

Munshi Premchand Jayanti: प्रेमचंद्र का लेखन

मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand Books) ने करीब 300 लघु कथाएं और लगभग 14 उपन्यास साथ ही कई सारे निबंध व पत्र लिखकर हिंदी साहित्य को रौशन किया है। प्रेमचंद्र कई भाषाओं के ज्ञाता थे औऱ उन्होने बहु-भाषिक साहित्यों का अनुवाद भी किया है। मस्त मौला मुंशी आगे चलकर वकील बनना चाहते थे लेकिन हालात ने उन्हे मार दिया और वो अपने संघर्ष के दम पर हेड मास्टर बन गए। 8 अक्टूबर 1936 को मुंशी (Munshi Pemchand Death) जलोदर रोग के कारण देहांत हो गया।

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Juli Kumari

Juli Kumari

जूली एक सिंपल सी लड़की है जिसे खुद सजना और ख़बरों को अपने शब्दों से सजाना बेहद पसंद है। जूली को राजनीति, लाइफस्टाइल और कविताएं लिखने का भी काफी शौक है। आप The Toss News में जूली के लिखे हुए लेखों को पढ़ सकते हैं और पसंद आए तो शेयर भी कर सकते हैं। और एक राज़ की बात बताऊं? कमेंट कर के या हमारे Social Media Platforms पर मेकअप और हेयरस्टाइल टिप्स भी ले सकते हैं।