जब एक महिला ने बलात्कारी के ऊपर गांधी से पूछे 3 सवाल, सुनिए गांधी के जवाब

जब एक महिला ने बलात्कारी के ऊपर गांधी से पूछे 3 सवाल, सुनिए गांधी के जवाब
▶️महिला हमलावर की ताकत का मुकाबला ना कर पाए तो, उसकी पवित्रता उसकी ताकत बनती है: गांधी
▶️मानव रूप में पल रहे किसी दानव द्वारा अगर महिला का शारीरिक शोषण किया जाता है, उस समय उसे हिंसा-अहिंसा को भूल कर, सबसे बड़ा धर्म आत्मरक्षा को मानना चाहिए
▶️बापू: जिस महिला का बलात्कार हुआ, वह किसी भी प्रकार के तिरस्कार और बहिष्कार की पात्र नहीं

Gandhi Jayanti 2020: भारत का प्रत्येक नागरिक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Father Of Nation Mahatma Gandhi) से परिचित जरूर होगा, होना भी चाहिए। आज के दिन सभी नागरिक उनके जन्मदिवस को मना भी रहे होंगे और मनाना भी चाहिए। प्रत्येक नागरिक जन्मदिन की शुभकामनाएं तो सभी को दे रहा होगा लेकिन क्या वह कुछ दिन पहले हमारी बहनों के साथ समाज में मनुष्य रूप में पल रहे राक्षसों द्वारा की गई दरिंदगी को भूल गया होगा?

बापू के जन्मदिन पर जानें उनके अच्छे विचार,

उनके सत्य के प्रयोग और कहानियां तो पढ़ ही रहे होंगे। इस लेख के माध्यम से आइए जानने का प्रयास करते हैं कि आखिर भारत के राष्ट्रपिता ने महिलाओं के साथ होने वाली दरिंदगी और हैवानियत के बारे में, क्या राय दिए हैं।

Gandhi Jayanti: Ideologies Of Gandhi ji

रावण सीता को हाथ भी ना लगा सका,“महिला की पवित्रता उसकी ताकत बनती हैं

‘द माइंड ऑफ महात्मा गांधी (The Mind Of Mahatma Gandhi)’ नामक एक किताब लिखी गई है। इस किताब में महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार और दुराचारी के ऊपर गांधी द्वारा दिए गए विचारों को संकलित किया गया है।

बलात्कार है क्या? महिलाओं की यौनिकता को किनारे रखकर सोचे तो, यह एक शारीरिक हमला और दुर्घटना ही है। गांधी ने स्वयं अपने बेटे मणिलाल को पत्र लिखा, ‘तुम प्रतिज्ञा करो कि तुम अपनी शारीरिक इच्छाओं को पूरा करने के लिए सुशीला का रेप नहीं करोगे और केवल सहमति के बाद ही संबंध बनाओगे। उसकी आजादी को खत्म नहीं करोगे।’ यानी यह तो स्पष्ट हो गया की महिलाओं के साथ दरिंदगी कभी भी और कहीं भी हो सकती है। क्योंकि दरिंदगी करने वालों की इस राष्ट्र में कमी भी नहीं!

Gandhi Jayanti: Ideologies Of Gandhi ji


गांधी इस पूरे संसार में महिलाओं को सबसे ताकतवर मानते थे। वे स्वयं कहते थे कि बल के मामले में भले ही पुरुष ताकतवर हो सकते हैं। किंतु अगर पुरुष अपनी उस ताकत से महिला के साथ अत्याचार करते हैं तो महिलाओं की पवित्रता उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती है।

रावण का नाम सामने आते ही जेहन में ताकत से परिपूर्ण एक व्यक्ति की छवि बनती है। ठीक विपरीत सीता का नाम कोमलता और पवित्रता के लिए लिया जाता है। रावण ने सीता को कई वर्षों तक लंका में कैदी बनाकर तो रखा। लेकिन सीता को कभी छू नहीं पाया। कारण आप समझ ही गए होंगे, सीता की पवित्रता उसकी ताकत बनी। सीता की पवित्रता के सामने महाबली रावण की ताकत नगण्य महसूस होती है।

शारिरिक दुष्कर्म के दौरान महिला क्या करे?

अगर किसी महिला के साथ शारीरिक दुष्कर्म हो रहा हो तो उस समय वह महिला क्या करें? इसका भी जवाब गांधी (Gandhi Ji Ideologies For Rape Victims) द्वारा दिया गया है। गांधी कहते हैं कि इस स्थिति में महिलाओं को हिंसा-अहिंसा का धर्म भूलकर, स्वयं की आत्मरक्षा को परम धर्म मानना चाहिए। उसे स्वयं अपने सम्मान की रक्षा के लिए अपने बल का प्रयोग करके मरने के डर को भूलकर लड़ना चाहिए। तभी वह अपनी और अपने समाज की रक्षा कर पाएंगी।

Gandhi Jayanti: Ideologies Of Gandhi ji

महिला के बलात्कार पर तीन सवाल, बापू के जवाब

जब-जब इस देश में महिलाओं के साथ दुष्कर्म और बलात्कार की घटनाएं होती हैं परिवार और समाज द्वारा सरकार से सवाल पूछे जाते हैं। हम लोकतांत्रिक देश भारत (Democratic Country India) की बात कर रहे हैं तो सवाल पूछना तो सबसे अच्छी बात है। आज प्रतिदिन देश की बेटियों के साथ होने वाले बलात्कारों पर आप सवाल पूछेंगे, शायद आपको जवाब ना भी मिले। लेकिन आगे आने वाले तीन सवालों और उनके जवाबों को आपको ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।
एक महिला द्वारा पत्र के माध्यम से गांधी से 3 सवाल पूछे गए।

  1. यदि कोई राक्षस-रूपी मनुष्य राह चलती किसी बहन पर हमला करे और उससे बलात्कार करने में सफल हो जाए, तो उस बहन का शील-भंग हुआ माना जाएगा या नहीं?
  2. क्या वो बहन तिरस्कार की पात्र है? क्या उसका बहिष्कार किया जा सकता है?
  3. ऐसी स्थिति में पड़ी हुई बहन और जनता को क्या करना चाहिए?
Gandhi Jayanti: Ideologies Of Gandhi ji

गांधी द्वारा इन सवालों का जवाब गुजराती पत्रिका ‘हरिजनबंधु (Gujrati Magazine Harijan Bandhu 1942)’ नामक पत्रिका के माध्यम से 1942 में दिया गया। गांधी द्वारा अपने लेख में लिखा, “जिस पर बलात्कार हुआ हो, वह स्त्री किसी भी प्रकार से तिरस्कार या बहिष्कार की पात्र नहीं है। वह तो दया की पात्र है। ऐसी स्त्री तो घायल हुई है, इसलिए हम जिस तरह घायलों की सेवा करते हैं, उसी तरह हमें उसकी सेवा करनी चाहिए। वास्तविक शील-भंग तो उस स्त्री का होता है जो उसके लिए सहमत हो जाती है। लेकिन जो उसका विरोध करने के बावजूद घायल हो जाती है, उसके संदर्भ में शील-भंग की अपेक्षा यह कहना अधिक उचित है कि उस पर बलात्कार हुआ। ‘
शील-भंग’ शब्द बदनामी का सूचक है और इस तरह वह ‘बलात्कार’ का पर्याय नहीं माना जा सकता है।”

Gandhi Jayanti: Ideologies Of Gandhi ji

हमारी राय

“The toss news” द्वारा गांधी के जन्मदिन (Gandhi Jayanti ) पर इस तरह की रिपोर्ट लाने का एकमात्र उद्देश्य यह की, अगर आप अहिंसा को हथियार बनाकर देश को आजाद कराने वाले बापू को असल मायने में राष्ट्रपिता मानते हैं, बापू द्वारा कही गई बातों, विचारों (Teachings Of Mahatma Gandhi) और सत्य के प्रयोगों को उनके जन्मदिन के अवसर पर व्हाट्सएप फेसबुक इत्यादि तमाम सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट कर रहे हैं, तो वर्तमान समाज में फैली सबसे बड़ी बुराईयां बलात्कारी, शारीरिक दुष्कर्म और शोषण आदि की गुलामी को गांधी के इन विचारों से दूर करने का प्रयास जरूर करना चाहिए।

अगर गांधी के विचारों से बाहर से आए अंग्रेज देश छोड़कर वापस जा सकते हैं तो अपने देश के नागरिकों की महिलाओं के प्रति मानसिकता को भी जरूर बदल सकते हैं। ‘The toss news’ आपके लिए समय-समय पर इस तरह के लेख लाते रहेगा।

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Manoj Thayat

Manoj Thayat

पत्रकारिता मनोज का जुनून है। इसी जुनून को जीने के लिए और अपने तरीके से ख़बरों को आप तक पहुँचाने के लिए मनोज The Toss News के साथ जुड़े हैं। मनोज को पढ़ने, लिखने और संवाद करने का बेहद शौक है। देश-दुनिया की ख़बरों को आप तक समय-समय पर पहुँचाना मनोज का लक्ष्य है। आप सभी रोज़ाना मनोज द्वारा लिखी गईं ख़बरें पढ़ सकते हैं और Comment में अपना Feedback भी दे सकते हैं।