छठ महापर्व: शुरू हुआ 36 घंटों का निर्जला व्रत, जानें नदी में उतरकर अरग देने का महत्व

छठ महापर्व: शुरू हुआ 36 घंटों का निर्जला व्रत, जानें नदी में उतरकर अरग देने का महत्व
▶️आज खरना के बाद 36 घंटों का निर्जला व्रत शुरू हो गया है, पानी में उतरकर अगर देने का है खास महत्व
▶️छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है पहला चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक माह में
▶️छठ त्यौहार संतान, आरोग्य, आयु, सुख-शांति आदि के लिए ज्यादा चर्चित है कई बार लोग दंडवत प्रणाम करते हुए घाट पर पहुंचते हैं

Chhath Puja 2020: चार दिन तक चलने वाले आस्था के महापर्व छठ पूजा की शुरूआत हो चुकी है। आज खरना के बाद 36 घंटों का निर्जला व्रत शुरू हो जाएगा। छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है पहला चैत्र माह में और दूसरा कार्तिक माह में। छठ पूजा (Chhath Mahaparv 2020) पर सूर्यदेव की उपासना की जाती है शास्त्रों में माना गया है कि छठी मैय्या (Chhathi Maiya) सूर्यदेव की बहन हैं औऱ वो सूर्यदेव की पूजा करने से खुश होती हैं।

पानी में प्रवेश कर अरग देने की प्रथा

मान्यता है कि ग्रहों के राजा सूर्य भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष हैं और वो कार्तिक मास में जल में निवास करते हैं। शास्त्रों के अनुसार नदी या तालाब में कमर तक प्रवेश कर अरग देने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और सूर्य दोनों को खुश होते हैं जिससे ग्रहों का नाश होता है इतना ही नहीं नदी में प्रवेश करने से सभी पाप व कष्ट खत्म हो जाते हैं।

Chhath Puja 2020 starts From Today

छठ पूजा से होती हैं सभी मनोकामनाएं पूरी

कहते हैं छठी मैय्या का व्रत (Chhath Puja Vart) बहुत फलदाई होता है। जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है मैय्या उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। खासतौर पर ये त्यौहार संतान, आरोग्य, आयु, सुख-शांति आदि के लिए ज्यादा चर्चित है। कई बार लोग मनोकामना के लिए घर से घाट तक दंडवत प्रणाम करते हुए पहुंचते हैं।

बेहद सावधानी से करना होता है व्रत

छठ का त्योहार बेहद पावन है माता को जरा सी भी लापरवाही पसंद नहीं है। इस दिन ठेकुए के भोग का खास महत्व है। माता के अरग के लिए अलग चूल्हे पर ठेकुआ बनाया जाता है। कई तरह के फल रखे जाते हैं। इस दौरान पूजा का प्रशाद बनाते समय खास ध्यान रखने की ज़रूरत होती है। अरग का सारा सामान सुबह-सुबह नहाकर अलग मिट्टी के चूल्हे पर बनाया जाता है इस दौरान हाथ पूरी तरह से साफ होना चाहिए, प्रशाद बनाने के बाद भी हाथ में या नाखूनों में जरा सा भी प्रशाद लगा हुआ नहीं होना चाहिए, हाथ को अच्छे से धोना होता है।

लोग बड़ी ही आस्था से इस त्यौहार को मनाते हैं। घाट पर हजारों लोगों की भीड़ एकत्रित होती है, इस दौरान यमुना नदी का भव्य नजारा देखने लायक होता है।

Omkar Bhaskar

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