जन्मदिन विशेष: रामनाथ कोविंद की संघर्ष से सफलता के बीच की एक करुणामयी कहानी

जन्मदिन विशेष: रामनाथ कोविंद की संघर्ष से सफलता के बीच की एक करुणामयी कहानी
▶️ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का बचपन बेहद ही गरीबी के बीच बीता
▶️ बचपन में घर में आग लगने से उनकी मां का देहांत हो गया
▶️ 13 साल की उम्र में 13 किलोमीटर पैदल चलकर कानपुर स्कूल जाते थे राष्ट्रपति

President Ramnath Kovind Birthday: संपूर्ण राष्ट्र आज भारत के वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind Age) का 75वां जन्मदिन मना रहा है। राष्ट्रपति का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर के परौंख गांव (Pairokh Village Kanpur) में हुआ था। बचपन का जीवन बेहद ही सादगी और गरीबी के बीच बीता। उनके जन्मदिन के मौके पर इस रिपोर्ट के माध्यम से आपके सम्मुख उनके जीवन की कुछएक ऐसी घटनाएं प्रस्तुत है। जो निश्चय ही प्रेरणादायक है।

जब 5 साल की उम्र में राष्ट्रपति के सिर से उठा मां का साया

रामनाथ कोविंद आज भारत के प्रथम नागरिक हैं। उनकी सफलता और संघर्ष की कहानी (Ramnath Kovind Interesting & Inspiring Story) की बात तो हर कोई कर रहा है। लेकिन उनके बचपन की एक ऐसी घटना है। जो हमेशा ही राष्ट्रपति के जहन में रहती होगी। परौंख गांव में घांस-फूस से बनी एक झोपड़ी में रामनाथ कोविंद रहते थे।

Ramnath Kovind Birthday Special

गोविंद के उम्र करीब 5-6 वर्ष के बीच में रही होगी। तभी उनके घर में आग लग जाती है। रामनाथ कोविंद को तो गांव वाले ने किसी तरह बचा लेते हैं। परंतु इस घटना में उनकी मां की मृत्यु हो जाती है। मात्र 5 वर्ष की उम्र में ही रामनाथ कोविंद के सिर से मां का साया उठ जाता है। मां के जाने के बाद पिता ने ही रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind Current Indian President) का लालन-पालन किया।

अभाव और संघर्षों के बीच शिक्षा की प्राप्ति

रामनाथ कोविंद का बचपन संघर्षों से भरा नजर आता है। पढ़ाई में अव्वल थे। लेकिन इस दौरान कठिनाइयां भी कई झेलनी पड़ी। पहली से पांचवी तक की पढ़ाई तो गांव में ही पूरी हुई। 5वीं से आगे की पढ़ाई के लिए गांव से 6 किलोमीटर दूर खानपुर-प्रयागपुर गांव (Khanpur-Prayagpur Village) के एक स्कूल में जाना पड़ता था। साइकिल थी नहीं इसलिए पैदल ही चलकर रोजाना स्कूल जाना होता था। ग्रामीणों की मानें तो, रामनाथ कोविंद ने 13 वर्ष की उम्र में 13 किलोमीटर रोजाना पैदल चलकर कानपुर पढ़ने जाते थे। गरीबी इतनी की पढ़ाई के साथ-साथ बेटियों के कपड़ों की दुकान पर काम भी किया।

कठिन परिश्रम और संघर्षों का ऐसा फल मिला की। कानपुर के एक छोटे से गांव से निकल कर रामनाथ कोविंद नामक बालक आज देश का प्रथम नागरिक ‘राष्ट्रपति’ बनकर देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

जन्मदिन विशेष की इस श्रृंखला में “the toss news” आप सभी के लिए इस तरह की रोचक और प्रेरणादायक रिपोर्ट लाते रहेगा। ताकि आप हो इन कहानियों से Inspire और करें कुछ अच्छा बेहतर काम!

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Manoj Thayat

Manoj Thayat

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