क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की 114वीं जयंती पर जाने उनमें जीवन के वो पहलू जो गर्व से सीना चौड़ा कर देती है

क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद की 114वीं जयंती पर जाने उनमें जीवन के वो पहलू जो गर्व से सीना चौड़ा कर देती है
▶️Chandrashekhar Azad Jayanti: क्रांतिकारी चंद्र शेखर आज़ाद की आज 114 जयंती (114th Birthanniversary) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंद्रशेखर आज़ाद को किया नमन
▶️ब्रिटिशों के हाथ ना आने के लिए खुद को ही गोली मार ली चंद्रशेखर आजाद ने
▶️आज़ाद ने केवल 14 साल की उम्र में दिसंबर 1921 में हुए ‘नॉन कॉर्पोरेशन मूवमेंट (Non-Corruption Movement)’ में हिस्सा लिया था

भारत के वीर पुत्र, निडर और स्वतंत्रता संग्राम (Freedom Fighter Chandrashekhar Azad) कहे जाने वाले चंद्र शेखर आज़ाद की आज जयंती (Chandrashekhar Azad Jayanti) पूरे देश में मनाई जा रही है, चंद्र शेखर अपने साहसी और देश के प्रति बलिदान के रूप में जाने जाते हैं। भारत के स्वतंत्रता सेनानी, चंद्र शेखर आज़ाद का जन्म आज से कुछ 114 साल (114th Birthanniversary Of Chandrashekhar Azad) पहले मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा (Bhabra, Jhabua Distt., Madhya Pradesh) नामक स्थान पर हुआ था।

भारत के महापुरुष के बारे में कुछ रोचक बातें

महात्मा गाँधी (Mahatama Gandhi) को अपनी प्रेरणा मानने वाले, चंद्र शेखर आज़ाद (Chandrashekhar Azad) ने केवल 14 साल की उम्र में दिसंबर 1921 में हुए ‘नॉन कॉर्पोरेशन मूवमेंट (Non-Corruption Movement)’ में हिस्सा लिया था, जिसके बाद उन्हें अंग्रेज़ो ने गिरफ्तार कर लिया था, जब उन्हें एक जज के सामने लाया गया तो उन्होंने अपना नाम आज़ाद और अपने पिता का नाम स्वतंत्रता बताया।

chandra shekhar azad

अपने देश को अंग्रेज़ो की गुलामी से बचाने के लिए आज़ाद ने ठान लिया था की वे देश को आज़ाद करवा कर रहेंगे। जिसके बाद ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन क्रांतिकारी दल के फाउंडर, राम प्रसाद बिस्मिल (Founder Of Revolutionary Party Of Hindustan Republic Association, Ram Prasad Bismil) ने उनके डेडिकेशन से प्रभावित होकर उन्हें इस दल का सुपरवाइसर बना दिया। आज़ाद अपनी एसोसिएशन के लिए फंड्स इक्कठे करते थे, जिसमे अधिकतर फंड्स ब्रिटिश सरकार (Fund British Goverment) से लुटे गए थे।

आज़ाद साल 1925 में हुए काकोरी रेल डकैती (kakori Rail Robbery) और 1928 में अस्सिस्टेंट सुपरिन्टेन्डेन्ट सौंडर्स (Assisstant Supritendent Saunders) की हत्या करने के बाद प्रसिद्ध हो गए थे।

Chandrashekhar Azad को ‘आज़ाद’ नाम कैसे मिला?

भारत भूमि के महान सुपुत्र चंद्रशेखर तिवारी (Chandrashekhar Tiwari) अपने युवावस्था से ही मातृभूमि के प्रति खुद को न्यौछावर कर चुके थे, चंद्रशेखर (Chandrashekhar Azad Jayanti) का काशी से गहरा नाता था, जिसकी वजह से वे काशी संस्कृत पढ़ने आए। उन्होंने बचपन से ही अंग्रेजो के खिलाफ आवाज़ उठायी, और उनकी इसी बहादुरी, और साहस की वजह से ‘आज़ाद’ नाम पड़ा। आज़ाद हमेशा अपने साथ माउज़र रखते थे, जिसका नाम उन्होंने बमतुल बुखारा (Bamatul Bukhara) रखा था।

Chandrashekhar Azad के कुछ असूल

आज़ाद ने कसम खायी थी की ब्रिटिश पुलिस (British Police) उन्हें कभी जीवित नहीं पकड़ पाएगी। इसी का एक उदाहरण हम आपको बताते हैं। जब १९ में पुलिस ने उन्हें चारो और से घेर लिया था, तब उनके चोट आने की वजह से उनका बचना मुश्किल था, उन्होंने ठान लिया था की उनकी मौत कभी भी किसी ब्रिटिश पुलिस (British Police) द्वारा नहीं होगी, इसी बात को ध्यान रखते हुए उन्होंने खुद को गोली मार ली थी।

ऐसे दी गई आज़ाद को श्रद्धांजलि

आज़ाद के इस बलिदान (Chandrashekhar Azad Sacrifice) को देश कभी नहीं भूला पाया है, और ना ही कभी भूलेगा। अल्फ्रेड पार्क (Alfred Park) में दिए अपने बलिदान के बाद, पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आज़ाद पार्क (Chandrshekhar Azad Park) रख दिया गया था। साथ ही जिस गांव में आज़ाद रहते थे उसका नाम धिमारपुरा से बदलकर आजादपुरा (Azadpura) रख दिया गया।

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Juli Kumari

Juli Kumari

जूली एक सिंपल सी लड़की है जिसे खुद सजना और ख़बरों को अपने शब्दों से सजाना बेहद पसंद है। जूली को राजनीति, लाइफस्टाइल और कविताएं लिखने का भी काफी शौक है। आप The Toss News में जूली के लिखे हुए लेखों को पढ़ सकते हैं और पसंद आए तो शेयर भी कर सकते हैं। और एक राज़ की बात बताऊं? कमेंट कर के या हमारे Social Media Platforms पर मेकअप और हेयरस्टाइल टिप्स भी ले सकते हैं।