जानिए क्या हैं लोकसभा से पारित कृषि विधेयक, क्यों हो रहा विरोध?

जानिए क्या हैं लोकसभा से पारित कृषि विधेयक, क्यों हो रहा विरोध?
▶️ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच किसानों से जुड़ा बिल गुरुवार को लोकसभा से पारित, किसान कर रहे हैं विरोध
▶️ भाजपा बोली- विधेयक किसानों के लिए वरदान, कांग्रेस का कहना- किसानों को होगा भारी नुकसान
▶️ प्रधानमंत्री बोले, तमाम शक्तियों द्वारा किसानों को किया जा रहा भ्रमित, विधेयक से किसानों को उनकी फसल का मिलेगा उचित मुल्य

Agriculture Ordinance Bill 2020: संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से शुरू हो चुका है। मॉनसून सत्र में केंद्र सरकार द्वारा किसानों से जुड़े तीन विधेयक संसद में प्रस्तुत किए गए हैं। इन विधेयकों का किसान संगठन और विपक्षी पार्टियों (opposition parties) द्वारा विरोध किया जा रहा है। भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद लोकसभा से विधेयक पास हो गए हैं।

किसान विधेयक पास, विपक्ष का हंगामा

मॉनसून सत्र के पहले दिन ही केंद्र सरकार ने किसानों से संबंधित कृषिक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक 2020, कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 पेश किया था।

Protests against agriculture ordinance bill

इसके बाद से किसान और विपक्ष की कई पार्टियों द्वारा इन विधेयकों का भारी विरोध किया गया। गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान 2 विधेयक पास हुए। हालांकि, आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 मंगलवार को ही लोकसभा से पारित हो गया था। अब इन तीनों विधेयकों को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

जानिए क्या है कृषि से जुड़े तीन नए विधेयक

1.कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान कराना) विधेयक 2020

मौजूदा समय में किसानों के पास अपनी फसल को बेचने के ज्यादा विकल्प नहीं थे। किसानों को एपीएमसी, रजिस्टर्ड लाइसेंस या सरकार को फसल बेचनी पड़ती थी।

इस अध्यादेश के आने के बाद किसान अपनी उपज देश में कहीं भी, किसी भी व्यक्ति या संस्था को बेच सकते हैं। इसके जरिये सरकार एक देश, एक बाजार की बात कर रही है। किसान अपना उत्पाद खेत में या व्यापारिक प्लेटफॉर्म पर देश में कहीं भी बेच सकेंगे।

2.कृषि (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक

मौजूदा समय में  किसान खेती करते समय, फसल को बेचते समय यानी किसानी से जुड़े हर रिस्क स्वयं ही लेता है।

इस अध्यादेश के आने के बाद कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता मिल जाएगी। सरकार का दावा है कि इसके बाद खेती से जुड़े रिस्क किसान नहीं लेगा बल्कि जो एग्रीमेंट करने वाला होगा वह लेगा। यानी साधारण भाषा में बड़े बिजनेस वाले लोग और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर किसानों से जमीन लेगें और उन पर खेती करेंगे। सरकार का मानना है कि किसानों को उनकी फसलों की अच्छी लागत मिलेगी, जो पहले कड़ी मेहनत के बाद भी नहीं मिलती थी। मार्केटिंग की लागत बचेगी और दलाल खत्म होंगे। अगर फसल कम दाम में भी बिकती है तब भी किसानों को गारंटेड मूल्य तो मिलेगा ही।

3.आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020

मौजूदा समय में 1995 में बने Essential Commodity Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम) का पालन होता है। जिसके तहत व्यापारियों द्वारा कृषि उत्पादों के एक लिमिट से ज्यादा भंडारण पर रोक लगा दी जाती है। जिसके अंतर्गत अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य-तेल, प्याज और आलू आदि के भंडारण (stocking) में रोक थी।

संशोधित अध्यादेश के आने के बाद आवश्यक वस्तुओं की सूची से अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को हटा दिया जाएगा। इन वस्तुओं पर राष्ट्रीय आपदा (national crisis) या अकाल जैसी विशेष परिस्थितियों के अलावा स्टॉक की सीमा नहीं लगेगी। सरकार का कहना है कि किसानों और उपभोक्‍ताओं दोनों के लिए ही यह मददगार साबित होगा। इसके साथ ही भंडारण सुविधाओं के अभाव के कारण होने वाली कृषि उपज की बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।

क्यों हो रहा कृषि विधेयकों का विरोध?

देश के किसान, किसान संगठन और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल किसान विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार, नए अध्यादेश के आने के बाद मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी। किसानों पर निजी कारोबारी और बाहरी कंपनियों का दबाव बढ़ेगा। किसानों का तो यहां तक भी कहना है कि उनकी जमीन पर प्राइवेट कंपनियों का अधिकार हो जाएगा। किसान मजबूर और मजदूर बनकर रह जाएगा। बड़े कारोबारियों द्वारा कालाबाजारी (black marketing) की जाएगी और मजदूरों को अपनी फसल के दाम के लिए पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर निर्भर होना पड़ेगा। लेकिन ऐसा नहीं है किसानों को उनकी फसल का अच्छा मुल्य मिलेगा। और परेशानियां भी कम होंगी।

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Manoj Thayat

Manoj Thayat

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